रविवार, 28 सितंबर 2008

भगवान की पत्नी

एक ठंडी रातमाल के बाहर एक छोटी लड़की खड़ी ठण्ड से काँप रही थीउसके पैरों में जूते नहीं थेकपडे भी साधारण से पहने थीवह सोच रही थी की भगवान अगर उसे जूते दिला देता तो.... । तभी एक महिला की नज़र उस पर पड़ीमहिला उसे प्यार से अपने साथ माल के अन्दर ले गईउसने उस लड़की के लिए जूते, मोजे और दस्ताने खरीदे। उसे नया स्वेटर दिलवायाउसके कानो पर नया मफलर लपेटते हुए पूछा अब ठीक है। 'जी' लड़की ने धीरे से कहाअच्छा अब चलते हैं- कह कर वह महिला बालिका को माल के बाहर छोड़ कर जाने लगी
'सुनिए' लड़की ने महिला को पुकारा।
'हाँ बेटे बताओ' महिला ने मुड़ते हुए पूछा ।
'क्या आप भगवान की पत्नी हैं' लड़की ने प्रश्न किया।

(कई साल पहले टाइम्स आफ इंडिया में छपी लघुकथा की स्मृति के आधार पर)

7 टिप्‍पणियां:

सतीश सक्सेना ने कहा…

क्या मासूमियत है ?

PS: pl remove word verification . this serve no purpose.

makrand ने कहा…

bhaut sunder
bahut merm he
regards

shyam kori 'uday' ने कहा…

सुन्दर व प्रसंशनीय अभिव्यक्ति है।

Ek ziddi dhun ने कहा…

मौका लगे तो विष्णु नागर की `ईश्वर की कहानियां' पढ़िएगा। दीवाली की मुबारकवाद

Dr. Nazar Mahmood ने कहा…

सुन्दर

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

Bahut khoob......

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत सुंदर मासूम सी बात